Read Gao Daan / گئودان by Munshi Premchand Free Online


Ebook Gao Daan / گئودان by Munshi Premchand read! Book Title: Gao Daan / گئودان
The author of the book: Munshi Premchand
Format files: PDF
The size of the: 33.57 MB
City - Country: No data
Loaded: 1687 times
Reader ratings: 5.5
Edition: Sang-e-Meel Publications
Date of issue: 2010
ISBN: 9693515803
ISBN 13: 9789693515800
Language: English

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⁠⁠⁠गोदान मानव जीवन के संघर्षों, आत्ममंथन और आत्मज्ञान की कहानी है। मैंने कई बार इस कृति के सारांश में यह पढ़ा है कि गोदान होरी नाम के एक किसान की कहानी है, मैं इस से सहमत नही हूँ। मेरे मत में इस कहानी में किसी एक को मुख्य पात्र कहना गलत है। गोदान जितनी होरी, धनिया, गोबर और उसके बाकी के परिवार की कहानी है उतनी ही उसके गांव के अन्य किरदारों की भी। इसी तरह शहरी पात्रों में भी जितना महत्व डॉक्टर मेहता और मालती देवी का है, उतना ही मिस्टर खन्ना और गोविन्दी देवी का भी और उतना ही राय साहब, ओंकारनाथ, मिर्ज़ा खुर्शेद, मिस्टर तन्खा इत्यादि का भी। कुल मिलाकर कहा जाए तो प्रेमचन्द जी ने इन सारे किरदारों से तत्कालीन भारतवर्ष के सभी स्वभाव, जाती और वर्ण के लोगों की मानसिकता का अचूक वर्णन किया है।

एक प्रमुख बात यह है कि उनके सभी पात्र इतने सच्चे और सटीक हैं कि आप वर्तमान काल में भी अपने आस पास ऐसे लोगों को देखते हैं और उनकी तुलना इन पात्रों से किये बिना नही रह सकते। परन्तु मेरे अनुसार इस कृति का सर्वोपरी गुण यह है कि प्रेमचन्द जी ने किसी भी पात्र को नायक या खलनायक के रूप में प्रस्तुत नही किया है, जो की वर्तमान काल में अक्षरशः सत्य है। जो होरी अपने परिवार के लिए खुद को होम कर रहा है वही कभी ऐसे निर्णय भी लेता है जिस से उसका परिवार जरा भी खुश नही होता है। जो मालती देवी सदैव अपने हित की सोचती हैं वही आत्ममंथन करने के पश्चात त्याग की मूर्ति बन जाती हैं। इसी प्रकार धनिया, गोबर, मेहता जी, मिस्टर खन्ना, राय साहब और बाकी सभी के अंदर गुण और अवगुण दोनों विद्यमान हैं। यह कहानी इस बात की पुष्टि करती है कि हममें से कोई भी पूर्ण रूप से अच्छा या बुरा नहीं होता अपितु भावावेश में आकर अन्यथा परिस्थितियों के अधीन होकर वह ऐसे कर्म करता है जिसे शेष समाज अच्छाई और बुराई के तराजू पर तौलकर अपना फैसला सुनाता है।

उस पर प्रेमचंद जी की शैली, उन्होंने इतने सरल शब्दों में इतनी गहरी बातें कहीं हैं कि आप उन पर विचार करने को विवश हो जाते हैं। मेरे जैेसा पाठक जो दर्शन शास्त्र में जरा भी रूचि नहीं रखता, इस कृति में लिखी दर्शन शास्त्र की बातों में उतना ही रस लेता है जितना अपने पसन्दीदा विषय की चर्चा में। यह मात्र एक पुस्तक ही नही अपितु एक जीवन अनुभव है जिसे आप पढ़ते नही जीते हैं और जिसके बाद आप खुद को थोड़ा और अनुभवी और थोड़ा और ज़िम्मेदार महसूस करते हैं।


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Read information about the author

Ebook Gao Daan / گئودان read Online! Munshi Premchand (Hindi: मुंशी प्रेमचंद) was an Indian writer famous for his modern Hindustani literature. He is one of the most celebrated writers of the Indian subcontinent,and is regarded as one of the foremost Hindustani writers of the early twentieth century.

Born Dhanpat Rai, he began writing under the pen name "Nawab Rai", but subsequently switched to "Premchand", while he is also known as "Munshi Premchand", Munshi being an honorary prefix. A novel writer, story writer and dramatist, he has been referred to as the "Upanyas Samrat" ("Emperor among Novelists") by some Hindi writers. His works include more than a dozen novels, around 250 short stories, several essays and translations of a number of foreign literary works into Hindi.

Premchand is considered the first Hindi author whose writings prominently featured realism. His novels describe the problems of the poor and the urban middle-class. His works depict a rationalistic outlook, which views religious values as something that allows the powerful hypocrites to exploit the weak. He used literature for the purpose of arousing public awareness about national and social issues and often wrote about topics related to corruption, child widowhood, prostitution, feudal system, poverty, colonialism and on the India's freedom movement.

Several of his early works, such as A Little Trick and A Moral Victory, satirised the Indians who cooperated with the British colonial government.

In the 1920s, he was influenced by Mahatma Gandhi's non-cooperation movement and the accompanying struggle for social reform. During this period, his works dealt with the social issues such as poverty, zamindari exploitation (Premashram, 1922), dowry system (Nirmala, 1925), educational reform and political oppression (Karmabhumi, 1931).

In his last days, he focused on village life as a stage for complex drama, as seen in his most famous work Godan as well as the short-story collection Kafan (1936).Premchand believed that social realism was the way for Hindi literature, as opposed to the "feminine quality", tenderness and emotion of the contemporary Bengali literature.


Reviews of the Gao Daan / گئودان


REUBEN

Do you need a book to diversify your evening? Maybe you found her.

CHARLIE

Why are you asking for a phone number?

HOLLY

An interesting book, not like the other

TOMMY

Bogus! You could have done better.

SARAH

Phone number you need to drive to protect against robots. I wrote the number and downloaded without registering.




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